प्रिय मित्र!
मेरी यह किताब “अधूरी कविताएँ” आपके समक्ष प्रस्तुत है। इस किताब में मेरी 104 रचनाएँ हैं। इन रचनाओं में 70 के आस–पास कविताएँ हैं। लगभग 10 गीत और कमोबेश उतनी ही ग़ज़लें हैं। और बाकी लघु कविताएँ हैं। इन रचनाओं में कुछ तो महज दिनों व महीनों की हैं तो कुछ दो दशक पुरानी भी हैं।
लगभग दो दशक पहले मेरे लेखन की शुरूआत कविताओं से ही हुई है। अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए यही एकमात्र साधन था मेरे पास, और आज भी है। मेरी कविताएँ नवभारत टाईम्स जैसे अख़बारों तथा कादम्बिनी जैसी पत्रिकाओं में छपा करती थीं। उसके बाद मैं मुंबई शिफ़्ट हो गया। काफी समय तक कविताओं से कटकर रहा। वो लिखने लगा, जिससे पैसे मिलते थे। टीवी के लिए भी लिखा। मगर कविताएँ मेरा पीछा कहाँ छोड़ने वाली थीं!
कुछ यूँ हुआ कि मुझे मुंबई छोड़कर भुवनेश्वर शिफ़्ट होना पड़ा। प्राईवेट सेक्टर में नौकरी करने लगा और फ़िलहाल भी कर रहा हूँ। और तब एक बार फिर कविताएँ मेरी दोस्त बन गईं। मैं फिर से कविताएँ लिखने लगा। लेखन के क्षेत्र में ही कुछ करना चाहता हूँ। यह किताब उसी दिशा में मेरा प्रयास है। अपनी पुरानी–नई रचनाओं को समेटकर किताब की शक्ल दे दी है। बेशक इन रचनाओं में कुछ बेहतरीन हैं, तो कुछ सामान्य। मगर मुझे मेरी सभी रचनाएँ प्यारी हैं। उम्मीद है आपको भी उनसे प्यार हो ही जाएगा। अतः आपसे मेरा विनम्र आग्रह है कि मेरी यह किताब “अधूरी कविताएँ” अवश्य पढ़ें।
Adhuri Kavitayen has 104 poems on love, desire, loneliness, pain, beautiful waken dreams, social issues, helplessness, blissful heart, joyous heart, dancing heart, state of speechlessness, correlation of body, mind and soul, beyond mind, beyond the limits of Worldly things and so on... They can be addressed as touchy poems, poems on longing and desire, poems on separation, poems on untold love, poems on ultimate feelings, unity with immortal etc.
आपका आपसा,
अनुराग पाण्डेय
भुवनेश्वर
27 फरवरी 2020